श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 35: बलदेवजीकी तीर्थयात्रा तथा प्रभास-क्षेत्रके प्रभावका वर्णनके प्रसंगमें चन्द्रमाके शापमोचनकी कथा  »  श्लोक 5-6h
 
 
श्लोक  9.35.5-6h 
वैशम्पायन उवाच
उपप्लव्ये निविष्टेषु पाण्डवेषु महात्मसु।
प्रेषितो धृतराष्ट्रस्य समीपं मधुसूदन:॥ ५॥
शमं प्रति महाबाहो हितार्थं सर्वदेहिनाम्।
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी बोले - राजन! बात उन दिनों की है, जब महामनस्वी पाण्डव उपप्लव्य नामक स्थान पर डेरा डाले हुए थे। महाबाहु! पाण्डवों ने समस्त प्राणियों के हितार्थ संधि करने के उद्देश्य से भगवान श्रीकृष्ण को धृतराष्ट्र के पास भेजा था।
 
Vaishampayanji said – King! It is about those days when Mahamanasvi Pandavas were camping in a place called Upaplavya. Great arms! The Pandavas sent Lord Krishna to Dhritarashtra for the purpose of a treaty for the benefit of all living beings. 5 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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