श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 35: बलदेवजीकी तीर्थयात्रा तथा प्रभास-क्षेत्रके प्रभावका वर्णनके प्रसंगमें चन्द्रमाके शापमोचनकी कथा  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  9.35.44 
कथमाप्लुत्य तस्मिंस्तु पुनराप्यायित: शशी।
एतन्मे सर्वमाचक्ष्व विस्तरेण महामुने॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
हे मुनिश्रेष्ठ! उस तीर्थ में स्नान करने से चन्द्रमा पुनः स्वस्थ कैसे हो गया? कृपया मुझे यह सब विस्तारपूर्वक बताइए॥ 44॥
 
O great sage! How did the Moon become healthy again after taking a dip in that holy place? Please tell me all this in detail. ॥ 44॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas