श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 35: बलदेवजीकी तीर्थयात्रा तथा प्रभास-क्षेत्रके प्रभावका वर्णनके प्रसंगमें चन्द्रमाके शापमोचनकी कथा  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  9.35.3 
एवमुक्त्वा तदा रामो यात: क्षत्रनिबर्हण:।
तस्य चागमनं भूयो ब्रह्मन् शंसितुमर्हसि॥ ३॥
 
 
अनुवाद
हे ब्रह्मन्! जब क्षत्रियों का संहार करने वाले बलरामजी उन दिनों ऐसी बातें कहकर चले गए, तब वे पुनः कैसे लौट आए, यह कृपा करके मुझे बताइए।॥3॥
 
Brahmin! When Balarama, the killer of Kshatriyas, left after saying such things in those days, please tell me how he came back again. ॥ 3॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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