श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 35: बलदेवजीकी तीर्थयात्रा तथा प्रभास-क्षेत्रके प्रभावका वर्णनके प्रसंगमें चन्द्रमाके शापमोचनकी कथा  »  श्लोक 18-19h
 
 
श्लोक  9.35.18-19h 
सुवर्णं रजतं चैव धेनूर्वासांसि वाजिन:।
कुञ्जरांश्च रथांश्चैव खरोष्ट्रं वाहनानि च॥ १८॥
क्षिप्रमानीयतां सर्वं तीर्थहेतो: परिच्छदम्।
 
 
अनुवाद
‘सोना, चाँदी, दूध देने वाली गायें, वस्त्र, घोड़े, हाथी, रथ, गधे, ऊँट और अन्य वाहन तथा तीर्थयात्रा के लिए आवश्यक सभी सामग्री शीघ्रता से ले आओ।॥18 1/2॥
 
‘Bring gold, silver, milk-giving cows, clothes, horses, elephants, chariots, donkeys, camels and other vehicles and all the articles required for the pilgrimage quickly.॥ 18 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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