श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 35: बलदेवजीकी तीर्थयात्रा तथा प्रभास-क्षेत्रके प्रभावका वर्णनके प्रसंगमें चन्द्रमाके शापमोचनकी कथा  »  श्लोक 15-16h
 
 
श्लोक  9.35.15-16h 
युयुधानेन सहितो वासुदेवस्तु पाण्डवान्।
रौहिणेये गते शूरे पुष्येण मधुसूदन:॥ १५॥
पाण्डवेयान् पुरस्कृत्य ययावभिमुख: कुरून्।
 
 
अनुवाद
भगवान श्रीकृष्ण ने सात्यकि के साथ पाण्डवों का पक्ष लिया। रोहिणीनन्दन और वीर बलरामजी के चले जाने के बाद मधुसूदन भगवान श्रीकृष्ण पाण्डवों का नेतृत्व करते हुए पुष्यनक्षत्र में कुरुक्षेत्र की ओर चले। 15 1/2॥
 
Lord Shri Krishna along with Satyaki took the side of Pandavas. After the departure of Rohininandan and brave Balramji, Madhusudan Lord Shri Krishna led the Pandavas and proceeded towards Kurukshetra in Pushyanakshatra. 15 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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