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श्लोक 9.35.13  |
ततो मन्युपरीतात्मा जगाम यदुनन्दन:।
तीर्थयात्रां हलधर: सरस्वत्यां महायशा:॥ १३॥ |
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| अनुवाद |
| इससे क्रुद्ध और दुःखी होकर महायदुनन्दन हलधर सरस्वती के तट पर तीर्थयात्रा के लिए चल पड़े ॥13॥ |
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| Feeling angry and saddened by this, the great Yadunandan Haldhar set out on a pilgrimage to the banks of Saraswati. 13॥ |
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