श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 35: बलदेवजीकी तीर्थयात्रा तथा प्रभास-क्षेत्रके प्रभावका वर्णनके प्रसंगमें चन्द्रमाके शापमोचनकी कथा  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  9.35.10 
न कुर्वन्ति वचो मह्यं कुरव: कालनोदिता:।
निर्गच्छध्वं पाण्डवेया: पुष्येण सहिता मया॥ १०॥
 
 
अनुवाद
कौरव काल के वशीभूत हो रहे हैं, इसीलिए मेरी बात नहीं सुनते। पाण्डवों! अब तुम सब लोग मेरे साथ पुष्य नक्षत्र में युद्ध के लिए प्रस्थान करो॥10॥
 
The Kauravas are being subjugated by time, that is why they do not listen to me. Pandavas! Now you all should set out with me for the war in the Pushya nakshatra.॥10॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas