श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 35: बलदेवजीकी तीर्थयात्रा तथा प्रभास-क्षेत्रके प्रभावका वर्णनके प्रसंगमें चन्द्रमाके शापमोचनकी कथा  »  श्लोक 1-2
 
 
श्लोक  9.35.1-2 
जनमेजय उवाच
पूर्वमेव यदा रामस्तस्मिन् युद्ध उपस्थिते।
आमन्त्र्य केशवं यातो वृष्णिभि: सहित: प्रभु:॥ १॥
साहाय्यं धार्तराष्ट्रस्य न च कर्तास्मि केशव।
न चैव पाण्डुपुत्राणां गमिष्यामि यथागतम्॥ २॥
 
 
अनुवाद
जनमेजय बोले - ब्रह्मन् ! जब महाभारत युद्ध के प्रारम्भ का समय निकट आया, तब युद्ध आरम्भ होने से पूर्व ही भगवान बलराम श्रीकृष्ण की सलाह लेकर अन्य वृष्णिवंशियों के साथ तीर्थयात्रा के लिए चले गए और जाते समय बोले - 'केशव ! मैं न तो धृतराष्ट्रपुत्र दुर्योधन की सहायता करूँगा और न ही पाण्डवों की ।' 1-2॥
 
Janamejaya said – Brahmin! When the time for the beginning of the Mahabharata war approached, even before the war began, Lord Balram, taking the advice of Shri Krishna, went for a pilgrimage along with other Vrishnivanshis and while leaving said, 'Keshav! I will neither help Dhritarashtra's son Duryodhana nor the Pandavas. 1-2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)