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mahabharat 9.32.64: महाराज! सुन्दर स्वर्ण कवच धारण करके और शिरस्त्राण धारण करके आपका पुत्र स्वर्णमय गिरिराज मेरु के समान शोभायमान हो गया॥64॥   |   mahabharat अध्याय 9.32: युधिष्ठिरके कहनेसे दुर्योधनका तालाबसे बाहर होकर किसी एक पाण्डवके साथ गदायुद्धके लिये तैयार होना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 32: युधिष्ठिरके कहनेसे दुर्योधनका तालाबसे बाहर होकर किसी एक पाण्डवके साथ गदायुद्धके लिये तैयार होना  »  श्लोक 64
 
 
श्लोक  9.32.64 
सोऽवबद्धशिरस्त्राण: शुभकाञ्चनवर्मभृत्।
रराज राजन् पुत्रस्ते काञ्चन: शैलराडिव॥ ६४॥
 
 
अनुवाद
महाराज! सुन्दर स्वर्ण कवच धारण करके और शिरस्त्राण धारण करके आपका पुत्र स्वर्णमय गिरिराज मेरु के समान शोभायमान हो गया॥64॥
 
Maharaj! Wearing a beautiful golden armor and wearing a headgear, your son became as beautiful as the golden Giriraj Meru. 64॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)