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mahabharat 9.32.49: उस समय रक्त से लथपथ दुर्योधन का शरीर जल से भीगे हुए तथा बहते हुए जलस्रोत वाले पर्वत के समान प्रतीत हो रहा था ॥49॥   |   mahabharat अध्याय 9.32: युधिष्ठिरके कहनेसे दुर्योधनका तालाबसे बाहर होकर किसी एक पाण्डवके साथ गदायुद्धके लिये तैयार होना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 32: युधिष्ठिरके कहनेसे दुर्योधनका तालाबसे बाहर होकर किसी एक पाण्डवके साथ गदायुद्धके लिये तैयार होना  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  9.32.49 
तस्य शोणितदिग्धस्य सलिलेन समुक्षितम्।
शरीरं स्म तदा भाति स्रवन्निव महीधर:॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
उस समय रक्त से लथपथ दुर्योधन का शरीर जल से भीगे हुए तथा बहते हुए जलस्रोत वाले पर्वत के समान प्रतीत हो रहा था ॥49॥
 
At that time, Duryodhana's body, soaked in blood, appeared like a mountain soaked in water and having a flowing source of water. ॥ 49॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)