श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 32: युधिष्ठिरके कहनेसे दुर्योधनका तालाबसे बाहर होकर किसी एक पाण्डवके साथ गदायुद्धके लिये तैयार होना  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  9.32.43 
वज्रहस्तं यथा शक्रं शूलहस्तं यथा हरम्।
ददृशु: सर्वपञ्चाला: पुत्रं तव जनाधिप॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
नरेश्वर! समस्त पांचालों ने आपके पुत्र को वज्रधारी इन्द्र और त्रिशूलधारी रुद्र के समान देखा॥43॥
 
Nareshwar! All the Panchalas saw your son like Indra wielding the thunderbolt and Rudra wielding the trident. 43॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)