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mahabharat 9.32.41-42: वह भरतवंशी वीर गदाधारी सूर्य के समान चमक रहा था। शत्रुओं का दमन करने वाले महाबाहु दुर्योधन को हाथ में गदा लिए जल से निकलते देख, समस्त प्राणियों को ऐसा प्रतीत होने लगा मानो राजदण्डधारी यमराज प्रकट हो गए हों।॥41-42॥   |   mahabharat अध्याय 9.32: युधिष्ठिरके कहनेसे दुर्योधनका तालाबसे बाहर होकर किसी एक पाण्डवके साथ गदायुद्धके लिये तैयार होना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 32: युधिष्ठिरके कहनेसे दुर्योधनका तालाबसे बाहर होकर किसी एक पाण्डवके साथ गदायुद्धके लिये तैयार होना  »  श्लोक 41-42
 
 
श्लोक  9.32.41-42 
सगदो भारतो भाति प्रतपन् भास्करो यथा॥ ४१॥
तमुत्तीर्णं महाबाहुं गदाहस्तमरिंदमम्।
मेनिरे सर्वभूतानि दण्डपाणिमिवान्तकम्॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
वह भरतवंशी वीर गदाधारी सूर्य के समान चमक रहा था। शत्रुओं का दमन करने वाले महाबाहु दुर्योधन को हाथ में गदा लिए जल से निकलते देख, समस्त प्राणियों को ऐसा प्रतीत होने लगा मानो राजदण्डधारी यमराज प्रकट हो गए हों।॥41-42॥
 
That valiant warrior of the Bharata clan wielding a mace was shining like the blazing Sun. Seeing the mighty-armed Duryodhana, the suppressor of enemies, emerging from the water with a mace in his hand, all beings began to believe as if the scepter-bearing Yamaraja had appeared. ॥ 41-42॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)