श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 32: युधिष्ठिरके कहनेसे दुर्योधनका तालाबसे बाहर होकर किसी एक पाण्डवके साथ गदायुद्धके लिये तैयार होना  »  श्लोक 31-32
 
 
श्लोक  9.32.31-32 
गदया त्वां महाबाहो विजेष्यामि सहानुजम्॥ ३१॥
पञ्चालान् सृञ्जयांश्चैव चे चान्ये तव सैनिका:।
न हि मे सम्भ्रमो जातु शक्रादपि युधिष्ठिर॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
महाबाहो! मैं अपनी गदा से तुम्हें, तुम्हारे भाइयों, पांचालों, सृंजयों और अन्य सैनिकों सहित परास्त कर दूँगा। युधिष्ठिर! मैं इन्द्र से भी नहीं डरता।
 
Mahabaho! With the help of my mace, I shall defeat you along with your brothers, the Panchalas and the Srinjayas and your other soldiers. Yudhishthira! I am never afraid even of Indra.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)