श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 32: युधिष्ठिरके कहनेसे दुर्योधनका तालाबसे बाहर होकर किसी एक पाण्डवके साथ गदायुद्धके लिये तैयार होना  »  श्लोक 30-31h
 
 
श्लोक  9.32.30-31h 
अस्त्राणामपि पर्यायं कर्तुमिच्छन्ति मानवा:॥ ३०॥
युद्धानामपि पर्यायो भवत्वनुमते तव।
 
 
अनुवाद
पुरुष एक-एक करके प्रत्येक हथियार का प्रयोग करना चाहते हैं, किन्तु आज आपकी अनुमति से एक समय में एक ही योद्धा के साथ युद्ध लड़ा जाना चाहिए। 30 1/2
 
The men want to use each weapon one by one, but today with your permission the war should be fought with one warrior at a time. 30 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)