श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 32: युधिष्ठिरके कहनेसे दुर्योधनका तालाबसे बाहर होकर किसी एक पाण्डवके साथ गदायुद्धके लिये तैयार होना  »  श्लोक 28-29h
 
 
श्लोक  9.32.28-29h 
हन्तैकं भवतामेक: शक्यं मां योऽभिमन्यते॥ २८॥
पदातिर्गदया संख्ये स युध्यतु मया सह।
 
 
अनुवाद
मैं हर्षपूर्वक कह ​​रहा हूँ कि 'तुममें से जो भी वीर पुरुष मुझे अकेले ही परास्त करने का अभिमान रखता हो, वह युद्धभूमि में गदा लेकर पैदल ही मेरे साथ युद्ध करे।'
 
I am saying with joy that 'Any one of you brave men who has the pride to defeat me alone, should fight with me on foot in the battlefield with a mace.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)