एवं तु विविधा वाचो जययुक्ता: पुन: पुन:।
कीर्तयन्ति स्म ते वीरास्तत्र तत्र जनाधिप॥ ७३॥
अनुवाद
हे मनुष्यों! विजयी पाण्डव वहाँ बार-बार नाना प्रकार की बातें कहने लगे।
O lord of men! The victorious Pandavas began saying various things there again and again. 73.
इति श्रीमहाभारते शल्यपर्वान्तर्गतगदापर्वणि सुयोधनयुधिष्ठिरसंवादे एकत्रिंशोऽध्याय:॥ ३१॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शल्यपर्वके अन्तर्गत गदापर्वमें दुर्योधन-युधिष्ठिरसंवादविषयक इकतीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ३१॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥