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mahabharat 9.30.47: हे भरतभूषण राजा! वे सब क्षत्रिय गर्जना और गर्जना करते हुए तुरन्त ही द्वैपायन नामक सरोवर पर पहुँच गये।   |   mahabharat अध्याय 9.30: अश्वत्थामा, कृतवर्मा और कृपाचार्यका सरोवरपर जाकर दुर्योधनसे युद्ध करनेके विषयमें बातचीत करना, व्याधोंसे दुर्योधनका पता पाकर युधिष्ठिरका सेनासहित सरोवरपर जाना और कृपाचार्य आदिका दूर हट जाना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 30: अश्वत्थामा, कृतवर्मा और कृपाचार्यका सरोवरपर जाकर दुर्योधनसे युद्ध करनेके विषयमें बातचीत करना, व्याधोंसे दुर्योधनका पता पाकर युधिष्ठिरका सेनासहित सरोवरपर जाना और कृपाचार्य आदिका दूर हट जाना  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  9.30.47 
सिंहनादांस्ततश्चक्रु: क्ष्वेडाश्च भरतर्षभ।
त्वरिता: क्षत्रिया राजन् जग्मुर्द्वैपायनं ह्रदम्॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
हे भरतभूषण राजा! वे सब क्षत्रिय गर्जना और गर्जना करते हुए तुरन्त ही द्वैपायन नामक सरोवर पर पहुँच गये।
 
O King of Bharatbhushan! All those Kshatriyas began to roar and roar and immediately reached the lake named Dwaipayana.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)