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mahabharat 9.3.58-59: राजा दुर्योधन के वचनों का आदर करके वे महारथी पुनः पाण्डवों के सामने युद्ध करने के लिए आये। वे पराजय सहन नहीं कर सकते थे, इसलिए उन्होंने पराक्रम करने पर ध्यान केन्द्रित किया।   |   mahabharat अध्याय 9.3: कर्णके मारे जानेपर पाण्डवोंके भयसे कौरव-सेनाका पलायन, सामना करनेवाले पचीस हजार पैदलोंका भीमसेनद्वारा वध तथा दुर्योधनका अपने सैनिकोंको समझा-बुझाकर पुन: पाण्डवोंके साथ युद्धमें लगाना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 3: कर्णके मारे जानेपर पाण्डवोंके भयसे कौरव-सेनाका पलायन, सामना करनेवाले पचीस हजार पैदलोंका भीमसेनद्वारा वध तथा दुर्योधनका अपने सैनिकोंको समझा-बुझाकर पुन: पाण्डवोंके साथ युद्धमें लगाना  »  श्लोक 58-59
 
 
श्लोक  9.3.58-59 
तस्य तद् वचनं राज्ञ: पूजयित्वा महारथा:॥ ५८॥
पुनरेवाभ्यवर्तन्त क्षत्रिया: पाण्डवान् प्रति।
पराजयममृष्यन्त: कृतचित्ताश्च विक्रमे॥ ५९॥
 
 
अनुवाद
राजा दुर्योधन के वचनों का आदर करके वे महारथी पुनः पाण्डवों के सामने युद्ध करने के लिए आये। वे पराजय सहन नहीं कर सकते थे, इसलिए उन्होंने पराक्रम करने पर ध्यान केन्द्रित किया।
 
Respecting the words of King Duryodhan, those mighty warriors again came in front of the Pandavas to fight. They could not bear the defeat; therefore they concentrated on performing valour. 58-59.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)