श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 3: कर्णके मारे जानेपर पाण्डवोंके भयसे कौरव-सेनाका पलायन, सामना करनेवाले पचीस हजार पैदलोंका भीमसेनद्वारा वध तथा दुर्योधनका अपने सैनिकोंको समझा-बुझाकर पुन: पाण्डवोंके साथ युद्धमें लगाना  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  9.3.43 
तत एनं शरै राजन् सहसा समवाकिरत्।
रजसा चोद्‍गतेनाथ न स्म किंचन दृश्यते॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
महाराज! तत्पश्चात् उन्होंने अचानक उस सेना को बाणों से ढक दिया। उस समय इतनी धूल उड़ी कि कुछ भी दिखाई नहीं दिया। 43.
 
King! Thereafter he suddenly covered that army with arrows. At that time so much dust rose that nothing could be seen. 43.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)