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mahabharat 9.3.35: तदनन्तर रथ और घोड़ों से रहित तथा बाणों से आच्छादित पच्चीस हजार पैदल योद्धा कुन्तीपुत्र अर्जुन पर टूट पड़े।   |   mahabharat अध्याय 9.3: कर्णके मारे जानेपर पाण्डवोंके भयसे कौरव-सेनाका पलायन, सामना करनेवाले पचीस हजार पैदलोंका भीमसेनद्वारा वध तथा दुर्योधनका अपने सैनिकोंको समझा-बुझाकर पुन: पाण्डवोंके साथ युद्धमें लगाना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 3: कर्णके मारे जानेपर पाण्डवोंके भयसे कौरव-सेनाका पलायन, सामना करनेवाले पचीस हजार पैदलोंका भीमसेनद्वारा वध तथा दुर्योधनका अपने सैनिकोंको समझा-बुझाकर पुन: पाण्डवोंके साथ युद्धमें लगाना  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  9.3.35 
विप्रहीनरथाश्वाश्च शरैश्च परिवारिता:।
पञ्चविंशतिसाहस्रा: पार्थमार्च्छन् पदातय:॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
तदनन्तर रथ और घोड़ों से रहित तथा बाणों से आच्छादित पच्चीस हजार पैदल योद्धा कुन्तीपुत्र अर्जुन पर टूट पड़े।
 
Then twenty-five thousand foot warriors, devoid of chariots and horses and covered with arrows, attacked Arjuna, the son of Kunti.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)