vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 9: शल्य पर्व
»
अध्याय 3: कर्णके मारे जानेपर पाण्डवोंके भयसे कौरव-सेनाका पलायन, सामना करनेवाले पचीस हजार पैदलोंका भीमसेनद्वारा वध तथा दुर्योधनका अपने सैनिकोंको समझा-बुझाकर पुन: पाण्डवोंके साथ युद्धमें लगाना
»
श्लोक 17-18h
श्लोक
9.3.17-18h
समरे युद्धॺमानं हि कौन्तेयो मां धनंजय:॥ १७॥
नोत्सहेताप्यतिक्रान्तुं वेलामिव महार्णव:।
अनुवाद
जिस प्रकार समुद्र अपने तट को पार नहीं कर सकता, उसी प्रकार कुन्तीपुत्र अर्जुन भी युद्धभूमि में लड़ते हुए मुझे पार करके आगे जाने का साहस नहीं कर सकता।
Just as the ocean cannot cross its shore, similarly Arjuna, the son of Kunti, while fighting in the battlefield cannot dare to cross me and go ahead.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×