श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 29: बची हुई समस्त कौरव-सेनाका वध, संजयका कैदसे छूटना, दुर्योधनका सरोवरमें प्रवेश तथा युयुत्सुका राजमहिलाओंके साथ हस्तिनापुरमें जाना  »  श्लोक 96-98h
 
 
श्लोक  9.29.96-98h 
एतच्छ्रुत्वा तु वचनं वैश्यापुत्रेण भाषितम्।
प्राप्तकालमिति ज्ञात्वा विदुर: सर्वधर्मवित्॥ ९६॥
अपूजयदमेयात्मा युयुत्सुं वाक्यमब्रवीत्।
प्राप्तकालमिदं सर्वं ब्रुवता भरतक्षये॥ ९७॥
रक्षित: कुलधर्मश्च सानुक्रोशतया त्वया।
 
 
अनुवाद
वैश्यपुत्र युयुत्सुकि की कही हुई यह बात सुनकर और उसे समयानुकूल जानकर सम्पूर्ण धर्मों के ज्ञाता और अपार आत्मबल से संपन्न विदुरजी ने युयुत्सुकि की बहुत प्रशंसा की और इस प्रकार बोले - 'भरतों के इस विनाश के समय जो तुम्हारा समयानुकूल कर्तव्य था, उसे कहकर तुमने अपनी कृपा से कुलधर्म की रक्षा की है। 96-97 1/2॥
 
Hearing this thing said by Vaishya's son Yuyutsuki and considering it to be timely, Vidurji, the knowledgeable person of all the religions and endowed with immeasurable self-power, praised Yuyutsuki profusely and said thus - 'By telling all this timely duty that was due to you at the time of this destruction of the Bharatas, you have saved the family religion due to your kindness. 96-97 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)