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mahabharat 9.29.87-88h: सूर्यास्त होते-होते वे सभी के साथ नेत्रों से आँसू बहाते हुए हस्तिनापुर में प्रवेश कर गए। उस समय उनका गला रुँध गया।   |   mahabharat अध्याय 9.29: बची हुई समस्त कौरव-सेनाका वध, संजयका कैदसे छूटना, दुर्योधनका सरोवरमें प्रवेश तथा युयुत्सुका राजमहिलाओंके साथ हस्तिनापुरमें जाना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 29: बची हुई समस्त कौरव-सेनाका वध, संजयका कैदसे छूटना, दुर्योधनका सरोवरमें प्रवेश तथा युयुत्सुका राजमहिलाओंके साथ हस्तिनापुरमें जाना  »  श्लोक 87-88h
 
 
श्लोक  9.29.87-88h 
तैश्चैव सहित: क्षिप्रमस्तं गच्छति भास्करे॥ ८७॥
प्रविष्टो हास्तिनपुरं बाष्पकण्ठोऽश्रुलोचन:।
 
 
अनुवाद
सूर्यास्त होते-होते वे सभी के साथ नेत्रों से आँसू बहाते हुए हस्तिनापुर में प्रवेश कर गए। उस समय उनका गला रुँध गया।
 
As the sun was setting he entered Hastinapur with all of them shedding tears from his eyes. At that time his throat was choked. 87 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)