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mahabharat 9.29.71-72: प्रजानाथ! द्वारपाल भी हाथों में बेंत लिए चल रहे थे। रानियों की रक्षा के लिए नियुक्त सेवक श्वेत और बहुमूल्य बिछौने लेकर शीघ्रता से नगर की ओर चलने लगे।   |   mahabharat अध्याय 9.29: बची हुई समस्त कौरव-सेनाका वध, संजयका कैदसे छूटना, दुर्योधनका सरोवरमें प्रवेश तथा युयुत्सुका राजमहिलाओंके साथ हस्तिनापुरमें जाना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 29: बची हुई समस्त कौरव-सेनाका वध, संजयका कैदसे छूटना, दुर्योधनका सरोवरमें प्रवेश तथा युयुत्सुका राजमहिलाओंके साथ हस्तिनापुरमें जाना  »  श्लोक 71-72
 
 
श्लोक  9.29.71-72 
वेत्रव्यासक्तहस्ताश्च द्वाराध्यक्षा विशाम्पते॥ ७१॥
शयनीयानि शुभ्राणि स्पर्ध्यास्तरणवन्ति च।
समादाय ययुस्तूर्णं नगरं दाररक्षिण:॥ ७२॥
 
 
अनुवाद
प्रजानाथ! द्वारपाल भी हाथों में बेंत लिए चल रहे थे। रानियों की रक्षा के लिए नियुक्त सेवक श्वेत और बहुमूल्य बिछौने लेकर शीघ्रता से नगर की ओर चलने लगे।
 
Prajanath! The gatekeepers were also walking with cane sticks in their hands. The servants appointed to protect the queens started walking quickly towards the city carrying white and precious beddings. 71-72.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)