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mahabharat 9.29.60-62h: राजन! मेरी बात सुनकर अश्वत्थामा उस विशाल सरोवर की ओर देखकर दुःखी स्वर में बोला - 'हाय! धिक्कार है तुम्हें, राजा दुर्योधन को यह नहीं मालूम कि हम सब जीवित हैं। उसके साथ रहकर ही हम शत्रुओं से युद्ध करने के लिए पर्याप्त हैं।'   |   mahabharat अध्याय 9.29: बची हुई समस्त कौरव-सेनाका वध, संजयका कैदसे छूटना, दुर्योधनका सरोवरमें प्रवेश तथा युयुत्सुका राजमहिलाओंके साथ हस्तिनापुरमें जाना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 29: बची हुई समस्त कौरव-सेनाका वध, संजयका कैदसे छूटना, दुर्योधनका सरोवरमें प्रवेश तथा युयुत्सुका राजमहिलाओंके साथ हस्तिनापुरमें जाना  »  श्लोक 60-62h
 
 
श्लोक  9.29.60-62h 
अश्वत्थामा तु तद् राजन् निशम्य वचनं मम॥ ६०॥
तं ह्रदं विपुलं प्रेक्ष्य करुणं पर्यदेवयत्।
अहोधिक् स न जानाति जीवतोऽस्मान् नराधिप:॥ ६१॥
पर्याप्ता हि वयं तेन सह योधयितुं परान्।
 
 
अनुवाद
राजन! मेरी बात सुनकर अश्वत्थामा उस विशाल सरोवर की ओर देखकर दुःखी स्वर में बोला - 'हाय! धिक्कार है तुम्हें, राजा दुर्योधन को यह नहीं मालूम कि हम सब जीवित हैं। उसके साथ रहकर ही हम शत्रुओं से युद्ध करने के लिए पर्याप्त हैं।'
 
King! After listening to me, Ashvatthama looked towards that huge lake and said in a sad cry - 'Oh! Shame on you, King Duryodhan does not know that we are all alive. By staying with him, we are enough to fight the enemies.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)