श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 29: बची हुई समस्त कौरव-सेनाका वध, संजयका कैदसे छूटना, दुर्योधनका सरोवरमें प्रवेश तथा युयुत्सुका राजमहिलाओंके साथ हस्तिनापुरमें जाना  »  श्लोक 57
 
 
श्लोक  9.29.57 
ते सर्वे मामभिप्रेक्ष्य तूर्णमश्वाननोदयन्।
उपायाय तु मामूचुर्दिष्टॺा जीवसि संजय॥ ५७॥
 
 
अनुवाद
मुझे देखते ही तीनों ने अपने घोड़े तेजी से दौड़ाए और मेरे पास आकर बोले - 'संजय! सौभाग्य है कि तुम जीवित हो।'
 
On seeing me all three of them quickly sped up their horses and came near me and said - 'Sanjay! It is fortunate that you are alive.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)