श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 29: बची हुई समस्त कौरव-सेनाका वध, संजयका कैदसे छूटना, दुर्योधनका सरोवरमें प्रवेश तथा युयुत्सुका राजमहिलाओंके साथ हस्तिनापुरमें जाना  »  श्लोक 51-53
 
 
श्लोक  9.29.51-53 
ब्रूया: संजय राजानं प्रज्ञाचक्षुषमीश्वरम्।
दुर्योधनस्तव सुत: प्रविष्टो ह्रदमित्युत॥ ५१॥
सुहृद्भिस्तादृशैर्हीन: पुत्रैर्भ्रातृभिरेव च।
पाण्डवैश्च हृते राज्ये को नु जीवेत मादृश:॥ ५२॥
आचक्षीथा: सर्वमिदं मां च मुक्तं महाहवात्।
अस्मिंस्तोयह्रदे गुप्तं जीवन्तं भृशविक्षतम्॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
संजय! आप बुद्धिमान एवं प्रतापी राजा को बताइए कि आपका पुत्र दुर्योधन ऐसे वीर मित्रों, पुत्रों और बंधुओं से वंचित होकर सरोवर में प्रवेश कर गया है। जब पांडवों ने मेरा राज्य छीन लिया है, तब मेरे समान इस दयनीय स्थिति में कौन जीवन निर्वाह कर सकता है? संजय! आप ये सब बातें बताइए और यह भी बताइए कि दुर्योधन उस महायुद्ध में बचकर इस जल से भरे हुए सरोवर में छिपा हुआ है और उसका पूरा शरीर बहुत बुरी तरह घायल है।
 
Sanjaya! You tell the wise and glorious King that your son Duryodhana, deprived of such valiant friends, sons and brothers, has entered the lake. When the Pandavas have taken away my kingdom, then who like me can carry on life in this pitiable condition? Sanjaya! You tell all these things and also tell that Duryodhana, having survived that great battle, is hiding in this lake filled with water and his whole body is very badly injured.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)