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mahabharat 9.29.38: धृष्टद्युम्न की बात सुनकर शिनि के पौत्र महारथी सात्यकि ने अपनी तीक्ष्ण तलवार उठाई और उसी क्षण मुझे मार डालने के लिए तैयार हो गये।   |   mahabharat अध्याय 9.29: बची हुई समस्त कौरव-सेनाका वध, संजयका कैदसे छूटना, दुर्योधनका सरोवरमें प्रवेश तथा युयुत्सुका राजमहिलाओंके साथ हस्तिनापुरमें जाना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 29: बची हुई समस्त कौरव-सेनाका वध, संजयका कैदसे छूटना, दुर्योधनका सरोवरमें प्रवेश तथा युयुत्सुका राजमहिलाओंके साथ हस्तिनापुरमें जाना  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  9.29.38 
धृष्टद्युम्नवच: श्रुत्वा शिनेर्नप्ता महारथ:।
उद्यम्य निशितं खड्गं हन्तुं मामुद्यतस्तदा॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
धृष्टद्युम्न की बात सुनकर शिनि के पौत्र महारथी सात्यकि ने अपनी तीक्ष्ण तलवार उठाई और उसी क्षण मुझे मार डालने के लिए तैयार हो गये।
 
On hearing Dhrishtadyumna's words, the great warrior Satyaki, the grandson of Shini, picked up his sharp sword and prepared to kill me at that very moment.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)