Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 9.29.25-26: महाराज! जब रथियों में श्रेष्ठ दुर्योधन ने युद्धस्थल में अपने किसी सहायक को न देखा, परन्तु शत्रुओं की गर्जना देखी और अपनी सेना का विनाश देखा, तब वह राजा अकेला ही अपने मृत घोड़े को वहीं छोड़कर भयभीत होकर पूर्व दिशा की ओर भाग गया। | mahabharat अध्याय 9.29: बची हुई समस्त कौरव-सेनाका वध, संजयका कैदसे छूटना, दुर्योधनका सरोवरमें प्रवेश तथा युयुत्सुका राजमहिलाओंके साथ हस्तिनापुरमें जाना । mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
नापश्यत् समरे कंचित् सहायं रथिनां वर:।
नर्दमानान् परान् दृष्ट्वा स्वबलस्य च संक्षयम्॥ २५॥
तथा दृष्ट्वा महाराज एक: स पृथिवीपति:।
हतं स्वहयमुत्सृज्य प्राङ्मुख: प्राद्रवद् भयात्॥ २६॥
अनुवाद
महाराज! जब रथियों में श्रेष्ठ दुर्योधन ने युद्धस्थल में अपने किसी सहायक को न देखा, परन्तु शत्रुओं की गर्जना देखी और अपनी सेना का विनाश देखा, तब वह राजा अकेला ही अपने मृत घोड़े को वहीं छोड़कर भयभीत होकर पूर्व दिशा की ओर भाग गया।
Maharaj! When Duryodhana, the best of charioteers, did not see any of his helpers on the battlefield, but saw the roaring of the enemies and saw the destruction of his army, then the king alone, leaving his dead horse there, fled towards the east in fear. 25-26.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥