श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 29: बची हुई समस्त कौरव-सेनाका वध, संजयका कैदसे छूटना, दुर्योधनका सरोवरमें प्रवेश तथा युयुत्सुका राजमहिलाओंके साथ हस्तिनापुरमें जाना  »  श्लोक 11-12h
 
 
श्लोक  9.29.11-12h 
तत् सैन्यं भरतश्रेष्ठ मुहूर्तेन महात्मभि:।
अवध्यत रणं प्राप्य त्रातारं नाभ्यविन्दत॥ ११॥
प्रतिष्ठमानं तु भयान्नावतिष्ठति दंशितम्।
 
 
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ! वह सेना युद्धभूमि में आई और महाबली पाण्डवों द्वारा दो घण्टे में ही मार गिराई गई। उस समय उसे कोई रक्षक नहीं मिला। वह कवच धारण करके युद्ध के लिए निकली, किन्तु भय के कारण वहाँ खड़ी न रह सकी।
 
O best of the Bharatas! That army came to the battlefield and was killed in just two hours by the great Pandavas. At that time it did not find any protector. It set out in armour for the battle, but could not stand there due to fear.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)