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mahabharat 9.29.105: युयुत्सु भी उस रात घर पर ही रहा। वह बहुत दुखी था और अपने सगे-संबंधियों के आदर-सत्कार करने पर भी उसे खुशी नहीं हुई। वह इस आपसी युद्ध में भरतवंश के भयंकर संहार के विचार में खोया हुआ था।   |   mahabharat अध्याय 9.29: बची हुई समस्त कौरव-सेनाका वध, संजयका कैदसे छूटना, दुर्योधनका सरोवरमें प्रवेश तथा युयुत्सुका राजमहिलाओंके साथ हस्तिनापुरमें जाना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 29: बची हुई समस्त कौरव-सेनाका वध, संजयका कैदसे छूटना, दुर्योधनका सरोवरमें प्रवेश तथा युयुत्सुका राजमहिलाओंके साथ हस्तिनापुरमें जाना  »  श्लोक 105
 
 
श्लोक  9.29.105 
युयुत्सुरपि तां रात्रिं स्वगृहे न्यवसत् तदा।
वन्द्यमान: स्वकैश्चापि नाभ्यनन्दत् सुदु:खित:।
चिन्तयान: क्षयं तीव्रं भरतानां परस्परम्॥ १०५॥
 
 
अनुवाद
युयुत्सु भी उस रात घर पर ही रहा। वह बहुत दुखी था और अपने सगे-संबंधियों के आदर-सत्कार करने पर भी उसे खुशी नहीं हुई। वह इस आपसी युद्ध में भरतवंश के भयंकर संहार के विचार में खोया हुआ था।
 
Yuyutsu also stayed at home that night. He was very sad and did not feel happy even when his relatives paid him respects. He was lost in the thought of the terrible massacre of the Bharat dynasty in this mutual war. 105.
 
इति श्रीमहाभारते शल्यपर्वणि ह्रदप्रवेशपर्वणि एकोनत्रिंशोऽध्याय:॥ २९॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शल्यपर्वके अन्तर्गत ह्रदप्रवेशपर्वमें उनतीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २९॥

(दाक्षिणात्य अधिक पाठके ८ श्लोक मिलाकर कुल ११३ श्लोक हैं।)
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)