Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 9.29.101-102: आज यहीं विश्राम करो। कल प्रातःकाल युधिष्ठिर के पास जाओ।' ऐसा कहकर विदुर ने युयुत्सु के साथ नेत्रों में आँसू भरकर महल में प्रवेश किया। वह महल नगर और जनपदवासियों के कोलाहल से भर गया॥102॥   |   mahabharat अध्याय 9.29: बची हुई समस्त कौरव-सेनाका वध, संजयका कैदसे छूटना, दुर्योधनका सरोवरमें प्रवेश तथा युयुत्सुका राजमहिलाओंके साथ हस्तिनापुरमें जाना   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 29: बची हुई समस्त कौरव-सेनाका वध, संजयका कैदसे छूटना, दुर्योधनका सरोवरमें प्रवेश तथा युयुत्सुका राजमहिलाओंके साथ हस्तिनापुरमें जाना  »  श्लोक 101-102
 
 
श्लोक  9.29.101-102 
अद्य त्वमिह विश्रान्त: श्वोऽभिगन्ता युधिष्ठिरम्।
एतावदुक्त्वा वचनं विदुर: साश्रुलोचन:॥ १०१॥
युयुत्सुं समनुप्राप्य प्रविवेश नृपक्षयम्।
पौरजानपदैर्दु:खाद्धाहेति भृशनादितम्॥ १०२॥
 
 
अनुवाद
आज यहीं विश्राम करो। कल प्रातःकाल युधिष्ठिर के पास जाओ।' ऐसा कहकर विदुर ने युयुत्सु के साथ नेत्रों में आँसू भरकर महल में प्रवेश किया। वह महल नगर और जनपदवासियों के कोलाहल से भर गया॥102॥
 
Rest here today. Go to Yudhishthira tomorrow morning' saying this, Vidura entered the palace with tears in his eyes along with Yuyutsu. That palace was filled with the hue and cry of the people of the city and the district.॥102॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)