श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 28: सहदेवके द्वारा उलूक और शकुनिका वध एवं बची हुई सेनासहित दुर्योधनका पलायन  »  श्लोक 68
 
 
श्लोक  9.28.68 
तं चापि सर्वे प्रतिपूजयन्तो
दृष्ट्वा ब्रुवाणा: सहदेवमाजौ।
दिष्टॺा हतो नैकृतिको महात्मा
सहात्मजो वीर रणे त्वयेति॥ ६८॥
 
 
अनुवाद
सहदेव को देखकर युद्धस्थल में उपस्थित सभी लोग उसकी प्रशंसा करते हुए कहने लगे, 'वीर! यह बड़े सौभाग्य की बात है कि तुमने छलपूर्वक जुए का प्रचार करने वाले महारथी शकुनि को उसके पुत्र सहित युद्धस्थल में मार डाला।'
 
On seeing Sahadeva, all the people in the battlefield started praising him and saying, 'Valiant! It is a matter of great fortune that you have killed the great warrior Shakuni, the propagator of deceitful gambling, along with his son on the battlefield.'
 
इति श्रीमहाभारते शल्यपर्वणि शकुन्युलूकवधेऽष्टाविंशोऽध्याय:॥ २८॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शल्यपर्वमें शकुनि और उलूकका वधविषयक अट्ठाईसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २८॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)