श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 28: सहदेवके द्वारा उलूक और शकुनिका वध एवं बची हुई सेनासहित दुर्योधनका पलायन  »  श्लोक 52-53
 
 
श्लोक  9.28.52-53 
निहतास्ते दुरात्मानो येऽस्मानवहसन् पुरा।
दुर्योधन: कुलाङ्गार: शिष्टस्त्वं चास्य मातुल:॥ ५२॥
अद्य ते निहनिष्यामि क्षुरेणोन्मथितं शिर:।
वृक्षात् फलमिवाविद्धं लगुडेन प्रमाथिना॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
वे सब दुष्टात्माएँ, जिन्होंने पूर्वकाल में हमारा उपहास किया था, मारे जा चुके हैं। अब केवल कुलांगार दुर्योधन और उसका मामा तुम - ये दो ही बचे हैं। जैसे वृक्ष से मथानी से मारकर फल तोड़ा जाता है, वैसे ही आज मैं छुरे से तुम्हारा सिर काटकर तुम्हें मृत्यु के हवाले कर दूँगा।॥52-53॥
 
All those evil souls who had mocked us in the past have been killed. Now only the Kulangaar Duryodhan and his uncle you - these two are left. Just as a fruit is plucked from a tree by hitting it with a churning stick, in the same way today I will cut off your head with a razor and hand you over to death.'॥ 52-53॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)