श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 28: सहदेवके द्वारा उलूक और शकुनिका वध एवं बची हुई सेनासहित दुर्योधनका पलायन  »  श्लोक 36-37h
 
 
श्लोक  9.28.36-37h 
सहदेवं समासाद्य त्रिभिर्विव्याध सायकै:।
तानपास्य शरान् मुक्तान् शरसंघै: प्रतापवान्॥ ३६॥
सहदेवो महाराज धनुश्चिच्छेद संयुगे।
 
 
अनुवाद
महाराज! इसके बाद वह सहदेव के पास गया और उस पर तीन बाणों से आक्रमण किया। वीर सहदेव ने अपने बाणों से उन बाणों को नष्ट कर दिया और युद्धभूमि में उसका धनुष काट डाला।
 
Maharaj! After this he went to Sahadeva and attacked him with three arrows. The valiant Sahadeva warded off those arrows with his own arrows and cut off his bow on the battlefield.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)