श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 24: श्रीकृष्णके सम्मुख अर्जुनद्वारा दुर्योधनके दुराग्रहकी निन्दा और रथियोंकी सेनाका संहार  »  श्लोक 66
 
 
श्लोक  9.24.66 
अनेकरूपाकृतिभिर्हि बाणै-
र्महारथानीकमनुप्रविश्य।
स एवैकस्तव पुत्रस्य सेनां
जघान दैत्यानिव वज्रपाणि:॥ ६६॥
 
 
अनुवाद
जिस प्रकार वज्रधारी इन्द्र राक्षसों का नाश करते हैं, उसी प्रकार अर्जुन ने अकेले ही रथियों की विशाल सेना में प्रवेश करके नाना प्रकार के आकार और रंग वाले बाणों से आपके पुत्र की सेना को नष्ट कर दिया।
 
Just as Indra, the bearer of the thunderbolt, destroys the demons, similarly Arjuna alone entered the huge army of charioteers and destroyed your son's army with arrows of many shapes and colours.
 
इति श्रीमहाभारते शल्यपर्वणि संकुलयुद्धे चतुर्विंशोऽध्याय:॥ २४॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शल्यपर्वमें संकुलयुद्धविषयक चौबीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २४॥

 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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