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श्लोक  9.24.59 
आसीत् सर्वमवच्छन्नं गाण्डीवप्रेषितै: शरै:।
न प्राज्ञायन्त समरे दिशो वा प्रदिशोऽपि वा॥ ५९॥
 
 
अनुवाद
उस युद्धभूमि में स्थित सभी वस्तुएँ गाण्डीव धनुष से छोड़े गए बाणों से ढक गई थीं, यहाँ तक कि दिशाएँ या उपदिशाएँ भी ज्ञात नहीं हो रही थीं।
 
All objects on that battlefield were covered by the arrows shot from the Gandiva bow. Even the directions or sub-directions could not be known. 59.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)