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mahabharat 9.24.56-57h: युद्धभूमि में सव्यसाची अर्जुन के बाणों से आच्छादित सैनिकों के बाण उनके कवच में नहीं फंसते थे, बल्कि उन्हें लगकर भूमि पर गिर पड़ते थे।   |   mahabharat अध्याय 9.24: श्रीकृष्णके सम्मुख अर्जुनद्वारा दुर्योधनके दुराग्रहकी निन्दा और रथियोंकी सेनाका संहार   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  9.24.56-57h 
इषुभिश्छाद्यमानानां समरे सव्यसाचिना॥ ५६॥
असज्जन्तस्तनुत्रेषु शरौघा: प्रापतन् भुवि।
 
 
अनुवाद
युद्धभूमि में सव्यसाची अर्जुन के बाणों से आच्छादित सैनिकों के बाण उनके कवच में नहीं फंसते थे, बल्कि उन्हें लगकर भूमि पर गिर पड़ते थे।
 
The arrows of the soldiers covered with arrows by Savyasachi Arjun in the battlefield did not get stuck on their armor. They would hit them and fall on the ground. 56 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)