Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 9.24.55-56h: तत्पश्चात्, जैसे मेघ जल की धारा बरसाता है, वैसे ही शत्रुओं को संताप देने वाले अर्जुन अपने रथ द्वारा सैकड़ों तीखे बाणों की वर्षा करते हुए युद्धभूमि में आगे बढ़े। उस समय मुड़े हुए सिरों वाले बाणों की भयंकर ध्वनि सुनाई देने लगी।   |   mahabharat अध्याय 9.24: श्रीकृष्णके सम्मुख अर्जुनद्वारा दुर्योधनके दुराग्रहकी निन्दा और रथियोंकी सेनाका संहार   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 24: श्रीकृष्णके सम्मुख अर्जुनद्वारा दुर्योधनके दुराग्रहकी निन्दा और रथियोंकी सेनाका संहार  »  श्लोक 55-56h
 
 
श्लोक  9.24.55-56h 
तत: प्रायाद् रथेनाजौ सव्यसाची परंतप:।
किरन् शरशतांस्तीक्ष्णान् वारिधारा घनो यथा॥ ५५॥
प्रादुरासीन्महान् शब्द: शराणां नतपर्वणाम्।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात्, जैसे मेघ जल की धारा बरसाता है, वैसे ही शत्रुओं को संताप देने वाले अर्जुन अपने रथ द्वारा सैकड़ों तीखे बाणों की वर्षा करते हुए युद्धभूमि में आगे बढ़े। उस समय मुड़े हुए सिरों वाले बाणों की भयंकर ध्वनि सुनाई देने लगी।
 
Then just as a cloud pours down a torrent of water, Arjuna, who torments his enemies, advanced on the battlefield in his chariot, showering hundreds of sharp arrows. At that time the loud sound of the arrows with bent tips began to be heard. 55 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)