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mahabharat 9.24.51: संजय कहते हैं- राजन! सव्यसाची अर्जुन की यह बात सुनकर, घोड़ों की लगाम हाथ में लेकर, दशार्हकुलनन्दन श्रीकृष्ण निर्भय होकर बलपूर्वक शत्रुओं की उस सेना में घुस गए॥51॥   |   mahabharat अध्याय 9.24: श्रीकृष्णके सम्मुख अर्जुनद्वारा दुर्योधनके दुराग्रहकी निन्दा और रथियोंकी सेनाका संहार   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  9.24.51 
संजय उवाच
अभीषुहस्तो दाशार्हस्तथोक्त: सव्यसाचिना।
तद् बलौघममित्राणामभीत: प्राविशद् बलात्॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं- राजन! सव्यसाची अर्जुन की यह बात सुनकर, घोड़ों की लगाम हाथ में लेकर, दशार्हकुलनन्दन श्रीकृष्ण निर्भय होकर बलपूर्वक शत्रुओं की उस सेना में घुस गए॥51॥
 
Sanjay says- Rajan! On hearing this from Savyasachi Arjuna, taking the reins of the horses in his hands, Dasharhakul Nandan Shri Krishna fearlessly entered that army of enemies with force. 51॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)