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श्लोक  9.24.37-38h 
कुलान्तकरणो व्यक्तं जात एष जनार्दन॥ ३७॥
तथास्य दृश्यते चेष्टा नीतिश्चैव विशाम्पते।
 
 
अनुवाद
जनार्दन! इसका जन्म अवश्य ही अपने कुल का नाश करने के लिए हुआ है। प्रजानाथ! इसकी नीति और कार्य ऐसे ही प्रतीत होते हैं।'
 
‘Janardan! He has definitely been born to destroy his family. Prajanath! His policy and actions seem to be like this. 37 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)