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mahabharat 9.23.83: वहाँ एक धड़ खड़ा हुआ दिखाई दे रहा था, जिसके एक हाथ में शत्रु का कटा हुआ सिर और उसके बाल थे, तथा दूसरे हाथ में रक्त से सनी हुई एक तेज तलवार थी।   |   mahabharat अध्याय 9.23: कौरवपक्षके सात सौ रथियोंका वध, उभयपक्षकी सेनाओंका मर्यादाशून्य घोर संग्राम तथा शकुनिका कूट युद्ध और उसकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 23: कौरवपक्षके सात सौ रथियोंका वध, उभयपक्षकी सेनाओंका मर्यादाशून्य घोर संग्राम तथा शकुनिका कूट युद्ध और उसकी पराजय  »  श्लोक 83
 
 
श्लोक  9.23.83 
शिरो गृहीत्वा केशेषु कबन्ध: स्म प्रदृश्यते।
उद्यम्य च शितं खड्गं रुधिरेण परिप्लुतम्॥ ८३॥
 
 
अनुवाद
वहाँ एक धड़ खड़ा हुआ दिखाई दे रहा था, जिसके एक हाथ में शत्रु का कटा हुआ सिर और उसके बाल थे, तथा दूसरे हाथ में रक्त से सनी हुई एक तेज तलवार थी।
 
There one could see a torso standing with one hand holding the severed head of an enemy along with his hair and in the other hand a sharp sword stained with blood.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)