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mahabharat 9.23.82: योद्धा जब तक जीवित रहे, पूरी शक्ति से आक्रमण करते रहे, किन्तु अन्ततः वे घावों से लहूलुहान होकर गिर पड़े। 82.   |   mahabharat अध्याय 9.23: कौरवपक्षके सात सौ रथियोंका वध, उभयपक्षकी सेनाओंका मर्यादाशून्य घोर संग्राम तथा शकुनिका कूट युद्ध और उसकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 23: कौरवपक्षके सात सौ रथियोंका वध, उभयपक्षकी सेनाओंका मर्यादाशून्य घोर संग्राम तथा शकुनिका कूट युद्ध और उसकी पराजय  »  श्लोक 82
 
 
श्लोक  9.23.82 
प्रहरन्तो यथाशक्ति यावत् प्राणस्य धारणम्।
योधा: परिपतन्ति स्म वमन्तो रुधिरं व्रणै:॥ ८२॥
 
 
अनुवाद
योद्धा जब तक जीवित रहे, पूरी शक्ति से आक्रमण करते रहे, किन्तु अन्ततः वे घावों से लहूलुहान होकर गिर पड़े। 82.
 
The warriors kept on attacking with all their might as long as they were alive, but ultimately they fell down bleeding from their wounds. 82.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)