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mahabharat 9.23.81: हे भारत! तलवारों, भालों और बर्छियों से एक-दूसरे को बार-बार घायल करते हुए भी आपके और पाण्डव योद्धा युद्ध से पीछे नहीं हटे।   |   mahabharat अध्याय 9.23: कौरवपक्षके सात सौ रथियोंका वध, उभयपक्षकी सेनाओंका मर्यादाशून्य घोर संग्राम तथा शकुनिका कूट युद्ध और उसकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 23: कौरवपक्षके सात सौ रथियोंका वध, उभयपक्षकी सेनाओंका मर्यादाशून्य घोर संग्राम तथा शकुनिका कूट युद्ध और उसकी पराजय  »  श्लोक 81
 
 
श्लोक  9.23.81 
असिभि: पट्टिशै: शूलैस्तक्षमाणा: पुन: पुन:।
तावका: पाण्डवेयाश्च न न्यवर्तन्त भारत॥ ८१॥
 
 
अनुवाद
हे भारत! तलवारों, भालों और बर्छियों से एक-दूसरे को बार-बार घायल करते हुए भी आपके और पाण्डव योद्धा युद्ध से पीछे नहीं हटे।
 
Bhaarat! Repeatedly wounding each other with swords, spears and lances, your warriors and those of the Pandavas never retreated from the battle.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)