श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 23: कौरवपक्षके सात सौ रथियोंका वध, उभयपक्षकी सेनाओंका मर्यादाशून्य घोर संग्राम तथा शकुनिका कूट युद्ध और उसकी पराजय  »  श्लोक 80
 
 
श्लोक  9.23.80 
नराश्वकायै: संछन्ना भूमिरासीद् विशाम्पते।
रुधिरोदकचित्रा च भीरूणां भयवर्धिनी॥ ८०॥
 
 
अनुवाद
हे प्रजानाथ! वह युद्धस्थल मनुष्यों और घोड़ों के शवों से पट गया था, तथा जल के समान बहता हुआ रक्त विचित्र शोभा पा रहा था, जिससे कायरों का भय बढ़ गया था।
 
O Prajanath! That battle-field was strewn with the corpses of men and horses, and the blood flowing like water had assumed a strange beauty, increasing the fear of the cowards. 80.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)