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mahabharat 9.23.78: राजन! विजय की इच्छा रखने वाले बहुत से क्षत्रिय बाणों की वर्षा से आच्छादित होकर प्राण त्यागकर पृथ्वी पर पड़े हुए थे॥78॥   |   mahabharat अध्याय 9.23: कौरवपक्षके सात सौ रथियोंका वध, उभयपक्षकी सेनाओंका मर्यादाशून्य घोर संग्राम तथा शकुनिका कूट युद्ध और उसकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 23: कौरवपक्षके सात सौ रथियोंका वध, उभयपक्षकी सेनाओंका मर्यादाशून्य घोर संग्राम तथा शकुनिका कूट युद्ध और उसकी पराजय  »  श्लोक 78
 
 
श्लोक  9.23.78 
बहवश्च गतप्राणा: क्षत्रिया जयगृद्धिन:।
भूमावभ्यपतन् राजन् शरवृष्टिभिरावृता:॥ ७८॥
 
 
अनुवाद
राजन! विजय की इच्छा रखने वाले बहुत से क्षत्रिय बाणों की वर्षा से आच्छादित होकर प्राण त्यागकर पृथ्वी पर पड़े हुए थे॥78॥
 
Rajan! Many Kshatriyas, desirous of victory, were covered with rain of arrows and had given up their lives and were lying on the earth. 78॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)