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mahabharat 9.23.71: जिस प्रकार पक्षी मांस के लिए एक दूसरे पर झपटते हैं, उसी प्रकार वहाँ के योद्धा अपने तीखे हथियारों से एक दूसरे पर टूट पड़े और अपने भाइयों, मित्रों और पुत्रों को भी मार डाला।   |   mahabharat अध्याय 9.23: कौरवपक्षके सात सौ रथियोंका वध, उभयपक्षकी सेनाओंका मर्यादाशून्य घोर संग्राम तथा शकुनिका कूट युद्ध और उसकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 23: कौरवपक्षके सात सौ रथियोंका वध, उभयपक्षकी सेनाओंका मर्यादाशून्य घोर संग्राम तथा शकुनिका कूट युद्ध और उसकी पराजय  »  श्लोक 71
 
 
श्लोक  9.23.71 
निघ्नन्तो निशितै:शस्त्रैर्भ्रातॄन् पुत्रान् सखीनपि।
योधा: परिपतन्ति स्म यथामिषकृते खगा:॥ ७१॥
 
 
अनुवाद
जिस प्रकार पक्षी मांस के लिए एक दूसरे पर झपटते हैं, उसी प्रकार वहाँ के योद्धा अपने तीखे हथियारों से एक दूसरे पर टूट पड़े और अपने भाइयों, मित्रों और पुत्रों को भी मार डाला।
 
Just as birds pounce upon one another for meat, similarly the warriors there fell upon one another with their sharp weapons, killing even their brothers, friends and sons.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)