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mahabharat 9.23.66-67h: फिर आपके सैनिकों और शत्रु के सैनिकों के बीच भयंकर युद्ध शुरू हो गया, जो अपने प्राणों की परवाह किए बिना एक दूसरे को मारने पर तुले हुए थे।   |   mahabharat अध्याय 9.23: कौरवपक्षके सात सौ रथियोंका वध, उभयपक्षकी सेनाओंका मर्यादाशून्य घोर संग्राम तथा शकुनिका कूट युद्ध और उसकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 23: कौरवपक्षके सात सौ रथियोंका वध, उभयपक्षकी सेनाओंका मर्यादाशून्य घोर संग्राम तथा शकुनिका कूट युद्ध और उसकी पराजय  »  श्लोक 66-67h
 
 
श्लोक  9.23.66-67h 
तत् पुनस्तुमुलं युद्धं प्राणांस्त्यक्त्वाभ्यवर्तत॥ ६६॥
तावकानां परेषां च परस्परवधैषिणाम्।
 
 
अनुवाद
फिर आपके सैनिकों और शत्रु के सैनिकों के बीच भयंकर युद्ध शुरू हो गया, जो अपने प्राणों की परवाह किए बिना एक दूसरे को मारने पर तुले हुए थे।
 
Then a fierce battle began between your soldiers and the enemy's soldiers, who wanted to kill each other, without caring about their lives. 66 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)