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श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 23: कौरवपक्षके सात सौ रथियोंका वध, उभयपक्षकी सेनाओंका मर्यादाशून्य घोर संग्राम तथा शकुनिका कूट युद्ध और उसकी पराजय  »  श्लोक 63-64h
 
 
श्लोक  9.23.63-64h 
ततस्तु द्रौपदेयाश्च ते च मत्ता महाद्विपा:॥ ६३॥
प्रययुर्यत्र पाञ्चाल्यो धृष्टद्युम्नो महारथ:।
 
 
अनुवाद
ये शब्द सुनकर द्रौपदी के पांचों पुत्र और मदमस्त हाथी उस स्थान पर गए जहां पांचाल राजकुमार और महान योद्धा धृष्टद्युम्न थे।
 
Hearing these words, Draupadi's five sons and the intoxicated elephant went to the place where the Panchala prince and great warrior Dhrishtadyumna was.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)