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mahabharat 9.23.60-61h: उस समय रक्त से सने पाण्डव सेना के घुड़सवार आसन्न महायुद्ध में प्राणों की परवाह न करते हुए इस प्रकार बोले -॥60 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 9.23: कौरवपक्षके सात सौ रथियोंका वध, उभयपक्षकी सेनाओंका मर्यादाशून्य घोर संग्राम तथा शकुनिका कूट युद्ध और उसकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 23: कौरवपक्षके सात सौ रथियोंका वध, उभयपक्षकी सेनाओंका मर्यादाशून्य घोर संग्राम तथा शकुनिका कूट युद्ध और उसकी पराजय  »  श्लोक 60-61h
 
 
श्लोक  9.23.60-61h 
अश्वारोहाश्च पाण्डूनामब्रुवन् रुधिरोक्षिता:॥ ६०॥
सुसंनिकृष्टे संग्रामे भूयिष्ठे त्यक्तजीविता:।
 
 
अनुवाद
उस समय रक्त से सने पाण्डव सेना के घुड़सवार आसन्न महायुद्ध में प्राणों की परवाह न करते हुए इस प्रकार बोले -॥60 1/2॥
 
At that time, the blood-stained horsemen of the Pandava army, fighting without any attachment to their lives in the impending great war, spoke thus -॥ 60 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)